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घर पर सिरका कैसे बनाएं: सेब, गन्ना और नारियल का सिरका

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सिरका बनाना असल में दो किण्वन (fermentation) एक के बाद एक हैं, और जब तक इन दोनों को अलग करके न देखा जाए, कोई भी विधि समझ में नहीं आती।

पहले चरण में यीस्ट फल की शक्कर को अल्कोहल में बदलता है। यह चरण हवा के बिना, बंद बर्तन में होता है। दूसरे चरण में एसिटिक अम्ल बैक्टीरिया — Acetobacter — उस अल्कोहल को एसिटिक अम्ल में बदलते हैं, और यहाँ सब उलटा है: अब ऑक्सीजन चाहिए, इसलिए बर्तन पर ढक्कन नहीं, कपड़ा बाँधा जाता है।

घर में जिसे लोग आमतौर पर “सिरका बनाना” कहते हैं, वह प्रायः दूसरा चरण ही है। अगर शुरुआत किसी ऐसी चीज़ से हो जो पहले ही किण्वित हो चुकी है, तो सिरका कुछ हफ़्तों में तैयार है। लेकिन अगर शुरुआत साबुत फल से है, तो पहले चरण का इंतज़ार करना होगा।

यह एक बात समझ में आते ही दो सबसे आम गलतफ़हमियाँ दूर हो जाती हैं: कसकर बंद जार में सिरका कभी नहीं बनेगा, और सफ़ेद डिस्टिल्ड सिरका तथा असली बालसैमिक घर पर बनाए ही नहीं जा सकते — कारण नीचे है।

🍶 संक्षेप में
दो चरणशक्कर → अल्कोहल (बंद) · अल्कोहल → एसिटिक अम्ल (खुला, हवा ज़रूरी)
समयफल से 6-10 हफ़्ते, किण्वित रस से 3-6 हफ़्ते
तापमान20-30 °C. भारतीय मौसम अनुकूल है, बस धूप से बचाएँ
बर्तनचौड़े मुँह का काँच और कपड़ा। धातु बिलकुल नहीं, चम्मच भी नहीं
घर पर संभव नहींसफ़ेद डिस्टिल्ड सिरका और असली बालसैमिक
अचार के लिएअम्लता अज्ञात रहती है — लंबे भंडारण वाले अचार में न लगाएँ
भारतीय विकल्पगन्ने और नारियल का सिरका, दोनों घर पर बनते हैं

क्या घर पर बन सकता है और क्या नहीं

दुकान का हर सिरका रसोई में दोहराया नहीं जा सकता। अंतर जाने बिना शुरू करना यानी छह हफ़्ते बाद निराशा।

प्रकारघर पर?कारण
सेब का सिरका✅ हाँसेब शक्कर और छिलके पर मौजूद जंगली यीस्ट दोनों देता है
अंगूर का सिरका✅ हाँवही सिद्धांत, और यही सबसे पुरानी विधि है
गन्ने का सिरका✅ हाँगोवा और दक्षिण भारत की पुरानी परंपरा
नारियल का सिरका✅ हाँकेरल और गोवा में नारियल पानी या नीरा से
जामुन/गुड़ का सिरका✅ हाँदोनों में पर्याप्त शक्कर होती है
सफ़ेद डिस्टिल्ड सिरका❌ नहींऔद्योगिक रूप से आसुत अल्कोहल से बनता है
बालसैमिक सिरका❌ नहींअसली पकाया हुआ अंगूर रस है, कम से कम 12 साल पुराना

सफ़ेद सिरके के बारे में यह धारणा आम है कि साफ़ दिखता है इसलिए ज़्यादा शुद्ध है। असल में यह एथेनॉल के ऑक्सीकरण से कारखाने में बनता है, और रंगहीन इसलिए है क्योंकि उसका कच्चा माल रंगहीन है। घर का फल-सिरका चाहे जितना छान लें, सुनहरा ही रहेगा।

बालसैमिक का मामला और स्पष्ट है। Aceto Balsamico Tradizionale DOP 100% पकाए हुए अंगूर रस से बनता है, अलग-अलग लकड़ी के घटते आकार वाले पीपों की कतार में बारह साल (extravecchio के लिए पच्चीस साल) रखा जाता है, और कैरेमल मिलाना प्रतिबंधित है। “घर का बालसैमिक” वाली विधियाँ दरअसल अंगूर की चाशनी में सिरका मिलाती हैं: गाढ़ी चटनी अच्छी बनती है, पर वह बालसैमिक नहीं है।

अगर बात खरीदने की ही है, तो तुलना सिरके के प्रकार और दाम में है।

मदर ऑफ विनेगर: ज़रूरी है या नहीं

मदर सतह पर तैरती चिकनी, जेली जैसी परत है। दिखने के बावजूद यह फफूँद नहीं है: यह सेल्युलोज़ का जाल है जिसे एसिटिक अम्ल बैक्टीरिया बनाते हैं और उसी में रहते हैं।

यह अनिवार्य नहीं है। सेब और अंगूर के छिलके पर यीस्ट और सिरका बैक्टीरिया दोनों पहले से हैं, और जार खुला रहने पर हवा से और आते रहते हैं। मदर से मिलती है रफ़्तार: कुछ हफ़्ते बचते हैं, और तेज़ अम्लीकरण दूसरे सूक्ष्मजीवों को पैर जमाने नहीं देता।

तीन तरीक़े हैं: बिना छना, बिना पाश्चुरीकृत “with the mother” वाले सिरके की तलछट; किसी परिचित से एक टुकड़ा; या बस इंतज़ार, कि खुद बन जाए।

मदर या फफूँद? मदर चिकनी, जेली जैसी, सफ़ेद-क्रीम रंग की और तरल से जुड़ी होती है। फफूँद रोएँदार, उठी हुई, सूखी दिखती है और हरी, काली या नीली होती है। फफूँद हो तो पूरा बैच फेंक दें।

सेब का सिरका: दो तरीक़े

तरीका 1 — छिलकों और गूदे के बचे हिस्से से

सेब के बचे हिस्सों का सबसे अच्छा उपयोग।

  1. जार तैयार करें। 1-2 लीटर का चौड़े मुँह वाला, गरम पानी-साबुन से धुला और अच्छी तरह खँगाला हुआ।
  2. तीन-चौथाई तक सेब के छिलके और बीच का हिस्सा भरें। सड़ा या फफूँदी लगा कुछ नहीं।
  3. शक्कर का पानी बनाएँ। एक बड़ा चम्मच शक्कर प्रति लीटर पानी, घुलने तक चलाएँ। शक्कर यीस्ट का ईंधन है; छिलकों में इतनी नहीं होती।
  4. ऊपर से डालें। सब कुछ पानी में डूबा रहे; जो तैरेगा उसमें फफूँद लगेगी।
  5. वज़न रखें। एक छोटी काँच की प्लेट टुकड़ों को नीचे दबाए रखती है।
  6. कपड़े से ढककर रबर बैंड लगाएँ। ढक्कन कभी नहीं: हवा अंदर आए, मक्खी नहीं।
  7. अँधेरी, गरम जगह पर रखें (20-25 °C)। रसोई की अलमारी ठीक है।
  8. पहले दो हफ़्ते रोज़ एक बार चलाएँ, लकड़ी या प्लास्टिक के चम्मच से। बुलबुले मतलब अल्कोहल वाला चरण चल रहा है।
  9. दो हफ़्ते बाद छान लें। गूदा फेंक दें, तरल साफ़ जार में डालें और फिर कपड़े से ढकें।
  10. 3-4 हफ़्ते और रखें। अब चलाना नहीं है: सतह पर बनी परत को छेड़ें नहीं।
  11. चखें और मनचाही खटास आने पर बोतल में भरें।

तरीका 2 — साबुत सेब से

सिरका ज़्यादा साफ़ और सुगंधित बनता है। सेब धोएँ पर रगड़ें नहीं, क्योंकि जंगली यीस्ट छिलके पर ही है। चार टुकड़े करें, जार भरें, और उसी शक्कर-पानी से आगे बढ़ें। कुल समय में करीब दो हफ़्ते जोड़ लें।

गन्ने और नारियल का सिरका

गन्ने का सिरका

गोवा और दक्षिण भारत की पुरानी विधि, और भारत में सबसे सस्ता कच्चा माल।

  1. ताज़ा गन्ने का रस लें, या गुड़ को पानी में घोलें (लगभग 150 ग्राम गुड़ प्रति लीटर)।
  2. चौड़े मुँह वाले काँच या चीनी मिट्टी के बर्तन में दो-तिहाई तक भरें।
  3. कपड़े से ढककर गरम, अँधेरी जगह पर रखें।
  4. पहले 8-10 दिन रोज़ चलाएँ। झाग और बुलबुले दिखेंगे — यही अल्कोहल वाला चरण है।
  5. झाग बैठ जाने पर छानें और साफ़ जार में डालें।
  6. 6-8 हफ़्ते बिना छेड़े रखें। सतह पर बनने वाली परत ही चाहिए।
  7. चखें, छानें, बोतल में भरें। रंग सुनहरा-भूरा और स्वाद हल्का मीठा रहता है।

नारियल का सिरका

केरल और गोवा में नारियल पानी या नीरा से बनाया जाता है। कच्चे नारियल का पानी लें, प्रति लीटर एक बड़ा चम्मच शक्कर मिलाएँ, कपड़े से ढकें और गरम जगह पर रखें। 4 हफ़्ते में अल्कोहल वाला चरण पूरा होता है और 6-8 हफ़्ते में सिरका। नतीजा हल्का, थोड़ा धुँधला सिरका, जो दक्षिण भारतीय करी और अचार में जमता है।

अंगूर या किण्वित रस से सबसे तेज़ रास्ता: पानी से आधा-आधा पतला करें, थोड़ी मदर या एक कप बिना छना सिरका मिलाएँ, कपड़े से ढककर 3-6 हफ़्ते रखें।

कितना समय लगता है

कच्चा मालअल्कोहल चरणसिरका चरणठहरावकुल
सेब के छिलके2 हफ़्ते3-4 हफ़्ते2-4 हफ़्ते7-10 हफ़्ते
साबुत सेब2-3 हफ़्ते4-6 हफ़्ते4 हफ़्ते10-13 हफ़्ते
अंगूर1-2 हफ़्ते4-6 हफ़्ते2-3 महीने4-5 महीने
गन्ने का रस / गुड़8-10 दिन6-8 हफ़्ते2-3 हफ़्ते10-13 हफ़्ते
नारियल पानी4 हफ़्ते6-8 हफ़्ते2-3 हफ़्ते12-15 हफ़्ते

ये अवधियाँ 20-25 °C के लिए हैं। भारत की गरमी में प्रक्रिया तालिका से तेज़ चलती है; लगातार एसी वाले कमरे में धीमी। फ़ैसला कैलेंडर नहीं, स्वाद करता है।

बर्तन और परिस्थितियाँ

  • काँच, चमकीली चीनी मिट्टी या फ़ूड ग्रेड प्लास्टिक। एसिटिक अम्ल धातु से क्रिया करता है: एल्युमिनियम, ताँबा, पीतल और खुला लोहा नहीं — चम्मच भी नहीं। स्टेनलेस थोड़ी देर के संपर्क में ठीक है, भंडारण के लिए नहीं।
  • चौड़ा मुँह। ऑक्सीजन सतह से आती है; पतली गर्दन वाली बोतल में दूसरा चरण लगभग रुक जाता है।
  • मलमल, किचन टॉवल या घना कपड़ा। एयरटाइट बंद करना मना है।
  • 20-30 °C और अँधेरा। सीधी धूप गरमी भी देती है और रोशनी भी, दोनों नुक़सानदेह।
  • जार हिलाएँ नहीं। दूसरे चरण में हिलाने से सतह की परत डूब जाती है और सब धीमा पड़ जाता है।

तैयार होने की पहचान

तीनों संकेत एक साथ:

गंध। शराब जैसी और खमीर वाली गंध पूरी तरह जानी चाहिए, बस तीखी सिरके की गंध बचे जो नाक में चुभे।

स्वाद। खटास जीभ के किनारों को खींचे। मिठास बची है तो शक्कर अभी बाक़ी है।

अम्लता। pH स्ट्रिप एक अंक देती है: तैयार सिरका आमतौर पर pH 2.5-3.5 होता है। पर pH यह नहीं बताता कि अम्ल कितने प्रतिशत है, और अगला हिस्सा इसी बारे में है।

लंबे भंडारण वाले अचार में घर का सिरका न लगाएँ

यह पूरे लेख की सबसे ज़रूरी बात है।

भंडारण वाले अचार में सिरका स्वाद की चीज़ नहीं है। वह वह अम्लता बनाता है जिसमें बॉटुलिज़्म पैदा करने वाले बैक्टीरिया नहीं पनपते। इसके लिए अम्लता कम से कम 5% और पूरे मर्तबान में एक जैसी होनी चाहिए।

और घर के सिरके की अम्लता अज्ञात रहती है और बैच-दर-बैच बदलती है। एक ही विधि से बने दो जार 3% और 6% निकल सकते हैं। इसीलिए अमेरिकी National Center for Home Food Preservation की सिफ़ारिश दो-टूक है: घर का सिरका और अज्ञात अम्लता वाला सिरका डिब्बाबंदी में इस्तेमाल न करें; लेबल पर 5% लिखा सिरका लें, और परखी हुई विधि में सिरके-पानी का अनुपात न बदलें।

आपका घर का सिरका सलाद ड्रेसिंग, उसी दिन के मैरिनेड, पतले पेय और सफ़ाई के लिए बढ़िया है। जो मर्तबान महीनों रखे रहेंगे, उनके लिए लेबल वाला सिरका ख़रीदें।

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फ्रिज वाला जल्दी अचार और भंडारण वाला अचार एक चीज़ नहीं हैं। जो कुछ दिनों में खत्म हो जाए और ठंडा रखा जाए, उसमें जोखिम नाम मात्र का है। जो मर्तबान बंद करके महीनों कमरे के तापमान पर रहेंगे, वे पूरी तरह अम्लता पर निर्भर हैं। घर का सिरका सिर्फ़ पहली स्थिति के लिए है।

आम दिक्कतें

सतह पर रोएँदार परत। फफूँद। हरी, काली या नीली हो तो पूरा बैच फेंक दें। कारण लगभग हमेशा यही होता है कि फल तरल से ऊपर निकल आया।

पतली, सिकुड़ी सफ़ेद झिल्ली। सतही यीस्ट (kahm)। नुक़सानदेह नहीं पर स्वाद बिगाड़ती है। हटा दें, चलाएँ, सामग्री डुबोएँ।

चिकनी जेली जैसी परत। यही मदर है। अगले बैच के लिए रख लें।

कुछ हो ही नहीं रहा। ठंड (15 °C से नीचे, अक्सर एसी की वजह से), जार बहुत बंद, या शक्कर कम। इसी क्रम में जाँचें।

बारीक हिलते धागे। सिरका कृमि (Turbatrix aceti)। हानिरहित माने जाते हैं पर देखने में बुरे: सिरका गरम करके छान लें, जार और कपड़ा बदल दें।

फल मक्खियाँ। कपड़े के किनारे से घुसती हैं — रबर बैंड और कसें।

छानना, बोतल में भरना, रखना

पहले कपड़े से, फिर कॉफ़ी फ़िल्टर से छानें। काँच की बोतल में भरकर कसकर बंद करें — इस बिंदु के बाद ऑक्सीजन की ज़रूरत नहीं, वरना अम्ल धीरे-धीरे टूटता है।

ठंडी अँधेरी जगह पर सालों चलता है। तलछट या नई मदर बन सकती है; दोनों ख़राबी नहीं हैं।

ज़्यादा स्थिर रखने के लिए पाश्चुरीकरण कर सकते हैं: 60-70 °C पर दस मिनट गरम करें। उबालें नहीं, वरना एसिटिक अम्ल उड़ जाता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

घर पर सिरका कैसे बनाएँ? फल और शक्कर वाला पानी चौड़े मुँह के जार में डालें, कपड़े से ढकें, 20-25 °C पर अँधेरे में रखें। शक्कर अल्कोहल बनती है और अल्कोहल एसिटिक अम्ल। कच्चे माल के अनुसार कुल सात हफ़्ते से पाँच महीने।

क्या सफ़ेद डिस्टिल्ड सिरका घर पर बन सकता है? नहीं। वह आसुत अल्कोहल से कारखाने में बनता है। घर का फल-सिरका छानने पर भी सुनहरा ही रहेगा।

क्या बालसैमिक सिरका घर पर बन सकता है? असली नहीं। असली बालसैमिक पकाया हुआ अंगूर रस है जो कम से कम बारह साल रखा जाता है। इंटरनेट की विधियाँ अंगूर की चाशनी में सिरका मिलाती हैं।

सेब का सिरका कैसे बनाएँ? जार तीन-चौथाई छिलकों और बीच के हिस्से से भरें, प्रति लीटर एक बड़ा चम्मच शक्कर वाला पानी डालें, कपड़े से ढकें। दो हफ़्ते रोज़ चलाएँ, छानें, फिर 3-4 हफ़्ते रखें।

गन्ने का सिरका कैसे बनाएँ? गन्ने का रस या गुड़-पानी कपड़े से ढककर 8-10 दिन रोज़ चलाएँ, छानें, फिर 6-8 हफ़्ते बिना छेड़े रखें।

घर के सिरके में कितना समय लगता है? सेब के छिलकों से सात से दस हफ़्ते, गन्ने से करीब तीन महीने, अंगूर से चार-पाँच महीने।

क्या मदर ज़रूरी है? नहीं। छिलके और हवा के बैक्टीरिया काफ़ी हैं। मदर सिर्फ़ रफ़्तार बढ़ाती है।

क्या जार पर ढक्कन लगाना है? दूसरे चरण में बिलकुल नहीं। ऑक्सीजन के बिना सिरका बैक्टीरिया काम नहीं करते।

फफूँद लग गई, क्या करें? हरी, काली या नीली रोएँदार परत फफूँद है और बैच फेंकना पड़ेगा। चिकनी, सफ़ेद, जेली जैसी परत मदर है और वही चाहिए।

क्या इससे अचार डाल सकते हैं? लंबे भंडारण वाला नहीं: अम्लता अज्ञात और अस्थिर होती है। उसके लिए 5% लिखा सिरका चाहिए।

अम्लता कैसे नापें? सही माप अनुमापन से होता है, जो घर पर मुश्किल है। pH स्ट्रिप संकेत (2.5-3.5) देती है, प्रतिशत नहीं।

किस बर्तन में बनाएँ? चौड़े मुँह का काँच, चमकीली चीनी मिट्टी या फ़ूड ग्रेड प्लास्टिक। एल्युमिनियम, ताँबा और खुली धातु अम्ल से क्रिया करते हैं।

शक्कर ज़रूरी है? सेब के छिलकों के साथ आमतौर पर हाँ, गन्ने और अंगूर के साथ आमतौर पर नहीं। यह यीस्ट का भोजन है, मिठास नहीं, और अंत तक खप जाती है।

घर का सिरका कितने समय चलता है? सालों, कसकर बंद, ठंडी अँधेरी जगह पर। तलछट और नई मदर सामान्य हैं।

अब भी शराब जैसी गंध क्यों आ रही है? पहला चरण पूरा नहीं हुआ। ज़्यादा गरम जगह पर रखें, देखें कि कपड़े से हवा गुज़र रही है, और कुछ हफ़्ते और दें।

दुकान के सिरके से क्या फ़र्क़ है? दुकान के सिरके की अम्लता तय और लिखी होती है, घर के की नहीं। बदले में घर का सिरका न छना है न पाश्चुरीकृत, इसलिए ज़्यादा सुगंधित है।

स्रोत

  1. National Center for Home Food Preservation — General information on pickling (अम्लता और घर के सिरके पर चेतावनी)। https://nchfp.uga.edu/how/pickle/general-information-pickling/general-information-on-pickling/
  2. South Dakota State University Extension — घरेलू डिब्बाबंदी में सिरके की अम्लता। https://extension.sdstate.edu/safety-concern-vinegar-acidity-level-home-canning
  3. Institute of Culinary Education — How to make vinegar from home. https://www.ice.edu/blog/making-vinegars
  4. Aceto Balsamico Tradizionale DOP और Modena IGP का अंतर। https://www.acetaiamarchi.com/en/difference-between-traditional-balsamic-vinegar-of-modena-dop-igp/
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4 अक्टूबर 2016

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